यह ट्रेन, अपने जीवन चक्र पर, यात्रा को सस्ता और अधिक आरामदायक बनाएगी । और इस रेल के इस्तेमाल से पर्यावरण को हानि भी नहीं पोहोचेगी ।
जी हां आपने बिलकुल सही पड़ा है, आधुनिक तकनीकों पर आधारित ये रेल जो की शताब्दी रेलगाड़ी को बदलने जा रही है वो अब पूरी तरह बन कर तैयार हो चुकी है । आपके सफर को सस्ता करने जा रही ये रेलगाड़ी पर्यावरण हितैषी भी है जिसमे इंजन भी नहीं होगा ।

 


यह बात 1988 की है जब भारत में पहली बार शताब्दी रेल पटरियों पर दौड़ी थी । वह देश के लिए रेलवे यात्रा में एक क्रांति थी, कुछ घंटों के भीतर दो-शहर के बीच यात्रा को पूरा करने का एक तेज़, आरामदायक तरीका था। शताब्दी की शुरूआत के 30 साल बाद आज २०१८ मे आओ हम सब एक नई स्व-चालित भारतीय रेलवे ट्रेन का स्वागत करे।

क्या नाम है इस रेल का और सबसे पहले कहा दौड़ेगी ये रेल ?

ट्रैन-18 नमक यह रेलगाड़ी को भारत मे चेन्नई स्थित रेलवे की Integral Coach फैक्ट्री मे तैयार किया गया है, जल्द ही शुरू होने जा रही यह रेल दिल्ली और भोपाल के बीच भारत के सबसे तेज शताब्दी एक्सप्रेस को बदलने के लिए लिए तैयार हो चुकी है।

आखिर क्यों खास है ये रेलगाड़ी ? कैसे है ये दूसरो से अलग ?

यह रेलगाड़ी देश की बाकि यात्रीगाड़ीयों मे उपयोग की जाने वाली तकनीक के संदर्भ में भी एक बड़े बदलाव को चिह्नित करती है। लोकोमोटिव (इंजन) के बजाए स्वयं प्रणोदन इकाइयों पर निर्भर करते हुए, यह रेलगाड़ी 160 किमी प्रति घंटे की गति प्राप्त करने में सक्षम हो जाएगी।

क्या है इस ट्रैन की प्रमुख विशेषताएं ? क्या है इसको लाने के पीछे सरकार का उद्देश्य ?

पढ़ते रहिये…..

देश की सबसे तेज होगी यह ट्रैन, जिसका उद्देश्य जनता को कम समय मे सफर करवाना होगा ।

आईसीएफ अधिकारी के मुताबिक, ट्रैन-18 के साथ यात्रा समय शताब्दी की तुलना में कम से कम 15% कम हो जाएगा। भारत मे अभी चलने वाली शताब्दी ट्रैन की रफ़्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटा है जो कि ट्रैन-18 की 160 किलोमेटेर प्रति घंटे से काम है, उनके मुताबिक इससे मौजूदा ट्रैक पर यात्रा का समय 15% कम हो जाएगा जो 130 किमी प्रति घंटे के लिए उपयुक्त है। यदि ट्रैक 160 किमी प्रति घंटे के लिए उपयुक्त है, तो यात्रा का समय और कम हो जाएगा।

यात्री के नज़रिये से अगर हम देखे तो क्या लाभ होंगे इसके ? क्या है इसकी प्रमुख विशेषताएं ?

यात्रियों के परिप्रेक्ष्य से, ट्रेन-18 विमान की तरह आराम प्रदान करेगी ! ट्रेन-18 मेट्रो नेटवर्क ट्रेनों के समान, प्रत्येक छोर पर ड्राइविंग कैब के साथ सभी 16 वातानुकूलित एसी कुर्सी कार होगी। यूरोपीय शैली की आरामदायक सीटों के साथ, ट्रेन 18 कार्यकारी और गैर-कार्यकारी कोचों की होगी । इसके साथ ही Diffused LED लाइट, personalised reading lights, हर सीट पर mobile charging points, बायो-वैक्यूम शौचालय, व्हीलचेयर पार्किंग की जगह, आटोमेटिक खुलने-बंद होने वाले दरवाज़े और मिनी पैंट्री इस नयी रेलगाड़ी की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं।

इस रेल को ले कर आखिर मोदी सरकार का क्या प्लान है ?

भारतीय रेलवे नेटवर्क पर बहुत कम ट्रैक ऐसे फैले हुए हैं जो 160 किमी प्रति घंटे की गति की अनुमति देते हैं, स्व-चालित ट्रेन-18 भारत में रेल यात्रा के भविष्य में एक निश्चित झलक है। भारतीय रेलवे प्रधानमंत्री मोदी और रेलमंत्री पियूष गोयल के निर्देशन मे गोल्डन चतुर्भुज जैसे प्रमुख मार्गों पर ट्रैक और सिग्नलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड कर रहा है, जिससे आने वाले सालों में तेज, अधिक आरामदायक और शानदार इंटर-सिटी ट्रेन यात्रा की उम्मीद कर सकते हैं।

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