भारत और चीन एशिया के दो बड़े देश है जो की इस समय पूरी दुनिया मे अपनी तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के लिए प्रसिद्द है। आने वाले समय मे ये दोनों देश पूरी दुनिया मे व्यापार की एक बहुत बड़ी मिसाल पेश करने की क्षमता रखते है जिसके लिए इन दोनों देशो को हर हाल मे एक दूसरे को साथ रखना ज़रूरी होगा जिससे इन दोनों देशो को फायदा मिलेगा। परन्तु मौजूदा हालात की तरफ देखने से इन दोनों देशो का एक साथ दिखना दूर दूर तक संभव नहीं लग रहा है, इसीलिए आने वाले दिनों मे इन दोनों देशो के बीच मैत्री की स्थापना को स्थापित करने के लिए एक आंतरिक सुरक्षा सहयोग समझौता होने जा रहा है |

Image result for india china relations

आगे बढ़ने से पहले ही हम ये बात जान ले की भारत और चाइना अपने ईतिहास मे पहली बार एक इंटरनल सिक्योरिटी एग्रीमेंट याने की आंतरिक सुरक्षा सहयोग समझौता हस्ताक्षर करने जा रहे है, ये समझौता के अंतर्गत दोनों देशो की अंदरूनी सुरक्षा, कानून की रक्षा एवं व्यवस्था पर ध्यान दिया जायेगा।

क्या है ये समझौता ? आखिर क्यों ज़रूरत है हमे ऐसे समझोतो की ?

आगे पढ़े….

आखिर क्या है ये समझौता ?

ऊपर से देखने पर 22 Oct को किये जाने वाला यह हश्ताक्षर समझौता कुछ खास नहीं दीखता है परन्तु भारत के गृह मंत्री होने के नाते राजनाथ सिंह के अंतर्गत आने वाले करीब 10 लाख सशस्त्र पुलिस बल और चाइना के लोक सुरक्षा मंत्री होने के नाते ज़हाओ कजहि के अंतर्गत आने वाले 19 लाख सशस्त्र पुलिस बल के बीच होने जा रहा है ये समझौता जिसके एक बार हश्ताक्षर हो जाने पर अगला समझौता जो आने वाले समय मे हम देख सकते है वो होगा प्रत्यर्पण संधि जिसमे सजा दिए गए कैदियों का आदान-प्रदान दोनों देशो के बीच मे आसानी से हो पायेगा।

आखिर क्यों ज़रूरत है हमे ऐसे समझोतो की ?
Related image

दरअसल देखा जाये तो कुल 10 भारतीय कैदी है जो चाइना मे सजा काट रहे है और उतने ही चीनी कैदी है जो अभी फिलहाल मे भारत मे अपनी सजा काट रहे है तो ऐसे मे ये समझौता ऊपर से देखने पर दोनों देशो की राजनीती पर कोई खासा असर नहीं करने वाला है, परन्तु जिस तरह से अभी डोकलाम के बाद भारत-चीन के बीच का माहोल है और जिस तरह दोनों ही देश एक दुसरो के आमने सामने खड़े दिख रहे है उसके हिसाब से इस हालात मे दोनों देशो के बीच एक छोटा सा समझौता होना भी अपने आप मे एक बहुत बड़ी सफलता ही है जिससे पूरी दुनिया मे दोनों देशो के करीब आने का सन्देश जायेगा जिसके चलते दोनों देशो को अपने-अपने व्यापार को दुनिया मे मज़बूती पोहोचने का मौका मिलेगा।

क्या चीन से बढ़ते संभंधो के कारण हमारे अमेरिका से सम्भन्ध ख़राब होंगे ?

 

आगे पढ़े….

भौगोलिक राजनीती पर इस समझौते का असर क्या रहेगा ?

दोनों देशो के बीच होने जा रहा ये समझौता भौगोलिक राजनीती के सुनहरे नियम को दर्शाता है जिसके अनुसार कोई दो देश स्थाई दुश्मन, या दोस्त नहीं होते, होते है तो बस दोनों के अपने अपने फायदे होते है। उदाहरण के टूर पर पाकिस्तान को ले लीजिये एक समय पर पाकिस्तान को भारत से भाईचारा आगे बढ़ाना था परन्तु उन्होंने नफरत को आगे रखा जिसका खामियाज़ा वो आज भुगत रहे है।

 

क्या चीन से बढ़ते संभंधो के कारण हमारे अमेरिका से सम्भन्ध ख़राब होंगे ?

नहीं बिलकुल नहीं, भारत के अमेरिका के अच्छे सम्बन्ध है जो की आने वाले समय मे और गहरे होने जा रहे है, हां अगर इस समझौते को देखते हुए अगर अमेरिकी सरकार भारत पर प्रतिबन्ध लगाना भी चाहे तो लगा नहीं सकती है क्युकी फिर उसके कारण भारत और चीन के बीच आने वाले समय मे ऐसे और समझौते स्थापित होने की सम्भावनाये बढ़ जाएँगी जो की अमेरिका बिलकुल भी नहीं चाहता है ।

अगर अमेरिका द्वारा लगाए हुए प्रतिबंधों का भारत को खतरा है तो फिर ये समझौता हम क्यों कर रहे है?

 

आगे पढ़े….

अगर अमेरिका द्वारा लगाए हुए प्रतिबंधों का भारत को खतरा है तो फिर ये समझौता हम क्यों कर रहे है?

दरअसल पिछले कुछ सालो मे भारत बहुत ही तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और निडर हो कर अपने फायदे के कदम उठा रहा है, जिसके चलते पिछले दिनों रूस से डिफेन्स मिसाइल सिस्टम लेना हो या ईरान से कच्चा तेल खरीदना हो, भारत अपने आप को मज़बूत बनाने के लिए अमेरिका से बिना डरे हर वो बड़े कदम उठा रहा है जिससे उसको फायदा मिले, उसी का परिणाम है भारत का चीन के साथ ये समझौता स्थापित करना, क्युकी कल को हर हाल मे ऐसा करने से भारत अपने आप को हर तरफ से सुरक्षित रखना चाहता है और सभी देशो से मित्रता कर के अपने आप को प्रगति की राह पर आगे ले जाना चाहता है।

क्या चाहते है प्रधानमंत्री मोदी ?

प्रधानमंत्री मंत्री का दफ्तर इस समय पूरी दुनिया की हर गतिविधियों पर नज़र रखे हुए है, भारत के प्रधानमंत्री मोदी अपने देश की पूरी दुनिया मे एक शांतिप्रिय देशो की सूची मे सबसे ऊपर स्थापित करना चाहते है जिसके लिए वो किसी भी देश से सम्बन्ध बिगड़ने नहीं देना चाहते है , चीन के साथ अच्छे सम्बन्ध स्थापित करने की उनकी तरफ से पहली कोशिश है जिसका आने वले समय मे भारत को बहुत लाभ मिलेगा ।

Tags:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *